"एक बात समारोह के नाम"
सादर जय माताजी री 🙏
आज समय मिला तो सोचा कि कुछ प्यार के प्रतीक
"धाट- पारकर" पर भी लिखूँ..........!
जब यह देश सुकूं से जी रहा था उन्हीं दिनों हम (धाट व पारकर) उस मुल्क में शायद अच्छा महसूस नहीं कर रहे थे। वह घटना देश के लिए युद्ध का कारण थी लेकिन हमारे लिए वह एक विभाजन था।
एक मुल्क से दूसरे मुल्क में प्रवेश कर विषम परिस्थितियों में हमारे पूर्वज ने किस प्रकार खुद को "मुश्किलों से न डटने वाला" साबित किया। किस प्रकार से तिनके के सहारे आशियाना बना ख़ुद को जीया। वे भी अपने आप में प्रतिभाएं थी। आज सामने होतीं तो सर्वोच्च सूची में उनको नवाजा जाता। ख़ैर जो हुआ अच्छा हुआ, ये हमारी मेहनत थी। उन विकट अवस्था से एक सामान्य तबके तक पहुंचना अपने आप में बहुत बड़ी बात है।
और इस जनसमूह के वजनी विचारों से आज समाज आगे बढ़ रहा है।
बड़े ही हर्ष की बात है कि गत दो वर्षों की भांति इस बार भी "तृतीय धाट पारकर सम्मान समारोह" होने जा रहा है, हमारी तरफ से शुभकामनाएं शामिल रहेंगी।
समारोह कई प्रकार के होते हैं, लेकिन इस प्रकार के समारोह से बालक-बालिका, युवा सभी को अग्रगामीता का आभास होगा। उनमें प्रेरणा के नवायाम का सृजन होगा, सम्मानित होती प्रतिभा को देखकर उनके भाई - बहन में नवाचार उत्पन्न होगा इत्यादि।
जैसा कि विदित है समारोह इस बार "आई श्री चंपामाता जी के मंदिर के आँचल में होने जा रहा है तो निश्चित है कि माँ की भी आशीर्वाद रुपी प्रेम-प्रेरणा साथ होगी जिससे हमें आगे सुख का जबरन अनुसरण करना पड़ेगा।
आयोजन का मुख्य उद्देश्य यही है कि "प्रतिभा " चाहे वह किसी भी क्षेत्र से हो उसमें एक उत्प्रेरक रूपी नवाचार को भरना है, जिससे कि वह आगे कुछ अच्छा करके समाज में, अपने घर में नयी प्रतिभा को निखारने में अपना अतुलनीय प्रेरणा रुपी प्यार दें।
समारोह को "प्रदर्शन न बनाकर दर्शन का विषय" बनाना इस समूह का अहम उदेश्य है। जिसके लिए अनेक प्रबुद्धजन कार्यरत है। मेरी निजी के सोच के अनुसार वे भी प्रतिभाएं है।
चूंकि में स्वयं एक विद्यार्जक हूँ और शायद विद्यार्जक का मतलब शिक्षा लेने वाला होता है न कि देने वाला।
लेकिन एक बात में मेरे प्यारे "धाट पारकर समाज" से कहूंगा कि कोई भी प्रोग्राम करें आप, सभी की शुभकामनाएं, निगाहें आपके साथ हर कदम रहेंगी लेकिन प्रोग्राम में सर्वोच्च तवज्जो उन प्रतिभावान व्यक्तियों को दें जो प्रेरणा देने के लिए मंचासीन हो अर्थात वे केवल शिक्षा के बूते पर अपनी कुर्सी बनाए हुए हो, क्यूंकि सम्मानित होने हेतु आये हुए प्रतिभाओं को उनसे ही प्रेरणा मिलेगी। दूसरी प्राथमिकता आप अन्य लोगों को दें। ख़ैर ये मेरे स्वतंत्र व निजी विचार है। सभी कार्यशील कर्मठ कार्यक्रम कार्यकर्ता महाशय है, समुचित सोच के अनुसार कार्य करेंगे।
कार्यक्रम बहुत ही अच्छे हुए है (विगत) बहुत ही अच्छा होगा.......... 💕
सभी आयोजनकारीयों को व समाज को दिली मुबारकबाद जिन्होंने इस मिशाल का एक प्रेरणा से संबंध किया व प्रतिभाओं को भी अग्रिम स्वर्णिम भविष्य की शुभकामनाएं! 💐
पुनः अग्रिम दिली शुभकामनाओं के साथ आयोजन के सफल होने के इन्तजार में आशान्वित!
भूल - चूक तो प्राणी से होती हैं"!
सादर 🙏
✍️"राजेन्द्र एस चारण बिजेरी"
सादर जय माताजी री 🙏
आज समय मिला तो सोचा कि कुछ प्यार के प्रतीक
"धाट- पारकर" पर भी लिखूँ..........!
जब यह देश सुकूं से जी रहा था उन्हीं दिनों हम (धाट व पारकर) उस मुल्क में शायद अच्छा महसूस नहीं कर रहे थे। वह घटना देश के लिए युद्ध का कारण थी लेकिन हमारे लिए वह एक विभाजन था।
एक मुल्क से दूसरे मुल्क में प्रवेश कर विषम परिस्थितियों में हमारे पूर्वज ने किस प्रकार खुद को "मुश्किलों से न डटने वाला" साबित किया। किस प्रकार से तिनके के सहारे आशियाना बना ख़ुद को जीया। वे भी अपने आप में प्रतिभाएं थी। आज सामने होतीं तो सर्वोच्च सूची में उनको नवाजा जाता। ख़ैर जो हुआ अच्छा हुआ, ये हमारी मेहनत थी। उन विकट अवस्था से एक सामान्य तबके तक पहुंचना अपने आप में बहुत बड़ी बात है।
और इस जनसमूह के वजनी विचारों से आज समाज आगे बढ़ रहा है।
बड़े ही हर्ष की बात है कि गत दो वर्षों की भांति इस बार भी "तृतीय धाट पारकर सम्मान समारोह" होने जा रहा है, हमारी तरफ से शुभकामनाएं शामिल रहेंगी।
समारोह कई प्रकार के होते हैं, लेकिन इस प्रकार के समारोह से बालक-बालिका, युवा सभी को अग्रगामीता का आभास होगा। उनमें प्रेरणा के नवायाम का सृजन होगा, सम्मानित होती प्रतिभा को देखकर उनके भाई - बहन में नवाचार उत्पन्न होगा इत्यादि।
जैसा कि विदित है समारोह इस बार "आई श्री चंपामाता जी के मंदिर के आँचल में होने जा रहा है तो निश्चित है कि माँ की भी आशीर्वाद रुपी प्रेम-प्रेरणा साथ होगी जिससे हमें आगे सुख का जबरन अनुसरण करना पड़ेगा।
आयोजन का मुख्य उद्देश्य यही है कि "प्रतिभा " चाहे वह किसी भी क्षेत्र से हो उसमें एक उत्प्रेरक रूपी नवाचार को भरना है, जिससे कि वह आगे कुछ अच्छा करके समाज में, अपने घर में नयी प्रतिभा को निखारने में अपना अतुलनीय प्रेरणा रुपी प्यार दें।
समारोह को "प्रदर्शन न बनाकर दर्शन का विषय" बनाना इस समूह का अहम उदेश्य है। जिसके लिए अनेक प्रबुद्धजन कार्यरत है। मेरी निजी के सोच के अनुसार वे भी प्रतिभाएं है।
चूंकि में स्वयं एक विद्यार्जक हूँ और शायद विद्यार्जक का मतलब शिक्षा लेने वाला होता है न कि देने वाला।
लेकिन एक बात में मेरे प्यारे "धाट पारकर समाज" से कहूंगा कि कोई भी प्रोग्राम करें आप, सभी की शुभकामनाएं, निगाहें आपके साथ हर कदम रहेंगी लेकिन प्रोग्राम में सर्वोच्च तवज्जो उन प्रतिभावान व्यक्तियों को दें जो प्रेरणा देने के लिए मंचासीन हो अर्थात वे केवल शिक्षा के बूते पर अपनी कुर्सी बनाए हुए हो, क्यूंकि सम्मानित होने हेतु आये हुए प्रतिभाओं को उनसे ही प्रेरणा मिलेगी। दूसरी प्राथमिकता आप अन्य लोगों को दें। ख़ैर ये मेरे स्वतंत्र व निजी विचार है। सभी कार्यशील कर्मठ कार्यक्रम कार्यकर्ता महाशय है, समुचित सोच के अनुसार कार्य करेंगे।
कार्यक्रम बहुत ही अच्छे हुए है (विगत) बहुत ही अच्छा होगा.......... 💕
सभी आयोजनकारीयों को व समाज को दिली मुबारकबाद जिन्होंने इस मिशाल का एक प्रेरणा से संबंध किया व प्रतिभाओं को भी अग्रिम स्वर्णिम भविष्य की शुभकामनाएं! 💐
पुनः अग्रिम दिली शुभकामनाओं के साथ आयोजन के सफल होने के इन्तजार में आशान्वित!
भूल - चूक तो प्राणी से होती हैं"!
सादर 🙏
✍️"राजेन्द्र एस चारण बिजेरी"

Comments
Post a Comment